तस्वीर और आकृतियां

ऐसा माना जाता है कि इस्लाम में जीवन रखने वाली चीज़ों की तस्वीर या आकृति बनाना हराम है।[1] बदकिस्मती से इस मुद्दे पर इस्लाम के रुख को समझने में बड़ी ग़लतफ़हमी हुई है। यह बात बिलकुल सही नहीं है कि इस्लाम में तस्वीरें और चित्र पूरी तरह से हराम हैं। इस्लाम ने सिर्फ उन तस्वीरों पर…

गाने और संगीत के बारे में

आम तौर पर यह माना जाता है कि ललित कलाओं (fine arts) को लेकर इस्लाम का रवैया बहुत उत्साहजनक या बहुत अच्छा नहीं है। इस्लाम इंसान की फितरत में मौजूद सौन्दर्य-बोध (जमालियात और खूबसूरती के एहसास) को ना ही ज़्यादा महत्व (अहमियत) देता है और ना उसे विकसित होने का मौका देता है, उदाहरण के तौर…