ख़ुदा के फ़ैसले !

रसूलों की तरफ़ से इत्मामे हुज्जत1 के बाद अगर उनको और उनके साथियों को ज़मीन के किसी हिस्से में सत्ता मिल जाए तो ख़ुदा का फ़ैसला है कि उनका इन्कार करने वालों के लिए दो ही सूरतें हैं: उनमें अगर मुशरिकीन (बहुदेवतावादी) होंगे तो क़त्ल कर दिए जाएँगे और किसी न किसी दर्जे में तौहीद…

इस्लाम और राष्ट्रीयता (क़ौमियत)

जावेद अहमद ग़ामिदी, मकामात अनुवाद: जुनैद मंसूरी रंग, नस्ल, भाषा, सांस्कृतिक परम्पराओं और क्षेत्र के आधार पर एक राष्ट्र (क़ौम) होने की भावना इन्सान के स्वभाव में पायी जाती है। सारे इन्सान एक ही मनुष्य की संतान हैं लेकिन अपने रिश्तेदारों से जो निकटता महसूस होती है वह दूसरे इंसानों से महसूस नहीं होती। यही मामला…

ख़िलाफ़त

["इसलाम और रियासत – एक जवाबी बयानिया” पर ऐतराज़ात के जवाब में लिखा गया लेख] जावेद अहमद ग़ामिदी  अनुवाद: आक़िब ख़ान इसमें शक नहीं कि “ख़िलाफ़त” का लफ़्ज़ कई सदीयों से “इस्तिलाह”* के तौर पर इस्तेमाल होता रहा है, लेकिन ये हरगिज़ कोई “मज़हबी इस्तिलाह” नहीं है। मज़हबी इस्तिलाह राज़ी, ग़ज़ाली, मावरदी, इब्न हज़म और इब्न ख़लदून** के बनाने से नहीं बनती और ना ही हर वो लफ़्ज़ जिसे मुसलमान किसी ख़ास मायने में इस्तेमाल करना…

इसलाम और रियासत (एक जवाबी बयानिया) – The Counter Narrative

जावेद अहमद ग़ामिदी  अनुवाद: आक़िब ख़ान इस समय जो हालात कुछ इंतिहापसंद तहरीकों ने अपनी कार्रवाइयों से इसलाम और मुसलमानों के लिए पूरी दुनिया में पैदा कर दी है, ये उसी विचारधारा का बुरा नतीजा है जो हमारे मज़हबी मदरसों में पढ़ा और पढ़ाया जाता है, और जिसका प्रचार इस्लामी तहरीकें और मज़हबी सियासी संगठन…

तालिबान के त्रुटिपूर्ण तर्क और वास्तविक इस्लाम

दुनिया जिन स्वयंनियुक्त ईश्वरीय योद्धाओं को तालिबान के नाम से जानती है, पिछले दस वर्षों में वो अनगिनत निर्दोष लोगों की हत्या कर चुके हैं।उनका आग्रह है कि ये सब वो परमेश्वर के लिए और परमेश्वर के आदेश के पालनमें कर रहे हैं। मलाला युसुफजई पर कायरतापूर्ण हमले के पश्चात भी उनहों ने अपने इसी…

मुसलमानों का ज़वाल ( पतन ) – कारण और हल

मुसलमान लगभग हज़ार वर्षों तक एक विश्व शक्ति रहे हैं। इल्म और हिकमत में, राजनीतिक कौशल और समृद्धि, दौलत और यश में कोई भी क़ौम उनके साथ बराबरी नहीं कर पाती थी। इस अवधि में पूरे विश्व पर उनकी हुकूमत थी। यह हुकूमत उन्हें अल्लाह के द्वारा दी गई थी और अल्लाह ने ही उनसे…

क्या एक मुसलमान शासक बहुमत के फैसले को बदल सकता है ?

लेखक: शेहज़ाद सलीम                                                                                          अनुवाद: मुहम्मद असजद आमतौर निम्नलिखित आयत की बुनियाद पर यह…

Is Democracy Compatible with Islam?

There are some major misconceptions about this issue. Muslim societies had monarchs ruling them for a very long period, stretching about a thousand years. Therefore, their system of government was based on monarchy. Excluding the period of the Rightly Guided Caliphs which consisted of a democratic system of governance, the rest of the time it…

The Hadith of Ghazwa-e-Hind- An analysis

Question The Prophet has said that two groups in my ummah (group of my followers) shall be successful. One which fights in Hind (India) and the other that accompanies Hadhrat Isa (Jesus) when he comes back. Can we say that the freedom fighters of Kashmir belong to the first of the two groups mentioned by…

ग़ज़वा-ए-हिन्द की कमज़ोर और ग़लत रिवायात का जायज़ा

(Read the original article in Urdu: http://www.javedahmadghamidi.com/books/view/ghazwa-e-hind-ki-kamzor-aur-ghalat-riwayaat-ka-jaiza) लेखक: मुहम्मद फारूक खां अनुवाद: मुहम्मद असजद हमारे दीन की तालीमात (शिक्षाएँ) बिलकुल साफ़ और वाज़ेह हैं, क्योंकि उन की बुनियाद कुरआन मजीद और सहीह हदीसों[1] पर है। कुरआन मजीद के मामले में तो किसी शक (संदेह) की गुंजाइश नहीं है, लेकिन क्योंकि हदीसें एक इंसान से दूसरे इंसान…