Economic Issues Uncategorized आर्थिक मुद्दे ग़लतफहमियां

व्यावसायिक ब्याज़ (Commercial Interest)

 कुछ लोग सोचते हैं कि व्यापारिक उपक्रमों (commercial enterprises) से लिया जाने वाला सूद निषिद्ध (हराम) नहीं है। इस ग़लतफहमी को दूर करते हुए ग़ामिदी साहब लिखते हैं[1]: यह साफ रहना चाहिए कि रिबा  का मतलब इससे तय नहीं होता कि क़र्ज़ निजी ज़रूरत, व्यापार या फिर कल्याण परियोजना (welfare scheme) के लिए लिया गया है। तथ्य यह है कि अरबी भाषा…

Uncategorized इबादत (उपासना पद्धति) सवाल-ओ-जवाब

वुज़ू और नेल पॉलिश

जावेद अहमद ग़ामिदी  अनुवाद: मुहम्मद असजद नाखूनों पर किसी ना किसी तरह की सामग्री से रंग करना आमतौर पर महिलाओं के बनाव-श्रृंगार का हिस्सा है। आज के दौर में अलग-अलग तरह की नेल पॉलिश इसके लिए इस्तेमाल की जाती हैं। इसके नतीजे में यह सवाल उठता है कि ऐसे में वुज़ू किस तरह होगी ?…

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ख़िलाफ़त

["इसलाम और रियासत – एक जवाबी बयानिया” पर ऐतराज़ात के जवाब में लिखा गया लेख] जावेद अहमद ग़ामिदी  अनुवाद: आक़िब ख़ान इसमें शक नहीं कि “ख़िलाफ़त” का लफ़्ज़ कई सदीयों से “इस्तिलाह”* के तौर पर इस्तेमाल होता रहा है, लेकिन ये हरगिज़ कोई “मज़हबी इस्तिलाह” नहीं है। मज़हबी इस्तिलाह राज़ी, ग़ज़ाली, मावरदी, इब्न हज़म और इब्न ख़लदून** के बनाने से नहीं बनती और ना ही हर वो लफ़्ज़ जिसे मुसलमान किसी ख़ास मायने में इस्तेमाल करना…

Jihad Misconceptions Political Issues Uncategorized अन्य धर्म ग़लतफहमियां जिहाद राजनीतिक मुद्दे विचार विमर्ष

इसलाम और रियासत (एक जवाबी बयानिया) – The Counter Narrative

जावेद अहमद ग़ामिदी  अनुवाद: आक़िब ख़ान इस समय जो हालात कुछ इंतिहापसंद तहरीकों ने अपनी कार्रवाइयों से इसलाम और मुसलमानों के लिए पूरी दुनिया में पैदा कर दी है, ये उसी विचारधारा का बुरा नतीजा है जो हमारे मज़हबी मदरसों में पढ़ा और पढ़ाया जाता है, और जिसका प्रचार इस्लामी तहरीकें और मज़हबी सियासी संगठन…