हलाला

यह कहा जा सकता है कि हलाला[1] की अवधारणा (तसव्वुर) इस्लामी न्यायशास्त्र (फ़िक्हा) का सबसे शर्मनाक मुद्दा है। शरीअत के अनुसार, अगर पति अपनी पत्नी को तीसरी बार तलाक़ दे देता है तो वह दोनों फिर से शादी नहीं कर सकते सिवाय इसके कि पत्नी किसी और से शादी कर ले और वहां से भी उसे तलाक़…

क्या एक मुसलमान शासक बहुमत के फैसले को बदल सकता है ?

लेखक: शेहज़ाद सलीम                                                                                          अनुवाद: मुहम्मद असजद आमतौर निम्नलिखित आयत की बुनियाद पर यह…

यतीम पोते की विरासत

लेखक: जावेद अहमद ग़ामिदी  अनुवाद: मुहम्मद असजद पोते की विरासत में दादा और दादा की विरासत में पोते का कोई हिस्सा साफ तौर पर तो कुरआन में बयान नहीं हुआ, लेकिन أولاد (औलाद) और آبا (आबा) के शब्दों में लुग़त (शब्दकोश) और उर्फ़ (इस्तेमाल), दोनों के एतबार से दादा और पोता भी शामिल हो जाते…

The Democratic Process in The Rightly Guided Caliphate

Author: Javed Ahmad Ghamidi According to the Qur’ānic directive of Amruhum Shūrā Baynahum (Their system is based on their consultation, (42:38)), the details of the methodology adopted by the Prophet (sws) and his companions for the participation of the Muslims in the affairs of the state in their own times, keeping in view their social…

Authoritativeness of the Isolate Hadith Narratives (Akhbar-i-Ahad)

Author: Amin Ahsan Islahi (d. 1997) The ḥadīth literature basically consists of individual-to-individual reports (akhbār-i āḥād). It is, therefore, necessary for us to properly grasp the issue of the authenticity of akhbār-i āḥād. The extraordinary importance the Ḥadīth holds as the source of the religion and the sharī‘ah, requires that we fully appreciate the implications…